कोई कसर ना छोड़ी हर तरह से दिल दुखाया तुमने,
सबकुछ जानते-पहचानते हुए भी हर बार तड़पाया तुमने,
हमने तो कर दी थी हवाले तुम्हारे,जिंदगी की किताब अपनी,
जब मन किया पढा और जब मन किया फाड़ डाला तुमने।
सबकुछ जानते-पहचानते हुए भी हर बार तड़पाया तुमने,
हमने तो कर दी थी हवाले तुम्हारे,जिंदगी की किताब अपनी,
जब मन किया पढा और जब मन किया फाड़ डाला तुमने।
No comments:
Post a Comment